तपोनिधि श्री आनंद अखाड़ा पंचायती, त्र्यंबकेश्वर (नाशिक)

।। अहरहः सूर्यमुपासीत् ।।

तंत्र कोई भय या व्यापार नहीं, बल्कि चेतना का विज्ञान है।

महंत श्री मलंगानंद महाराज — गृहस्थ महंत (गृहस्थ आश्रम) एवं शिव-शक्ति साधक। शास्त्र-सम्मत साधना, निःशुल्क दीक्षा और निष्काम जनकल्याण।

आदिशक्ति माँ — ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव सहित पारंपरिक चित्र

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महंत श्री मलंगानंद महाराज, त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर में

परिचय

महंत श्री मलंगानंद महाराज

गृहस्थ महंत (गृहस्थ आश्रम) · तंत्र साधक

भगवान शिव एवं माँ कामाख्या की कृपा से साधना-पथ पर चलने वाले एक विनम्र शिव-शक्ति साधक। कामाख्या धाम, कालीघाट एवं त्र्यंबकेश्वर की पावन भूमि पर गुरुजनों के सान्निध्य में साधना का सौभाग्य मिला, और तपोनिधि श्री आनंद अखाड़ा पंचायती ने कृपापूर्वक महंत पद का दायित्व सौंपा।

“श्रेयान्द्रव्यमयाद्यज्ञाज्ज्ञानयज्ञः परन्तप।”

— श्रीमद्भगवद्गीता ४.३३

अज्ञानता और अंधविश्वास का नाश ही सबसे बड़ा ‘ज्ञान यज्ञ’ है। तंत्र विद्या को पाखंड और भय के आवरण से मुक्त कर, निष्काम भाव से जनकल्याण के लिए इसका उपयोग करना ही मेरा वास्तविक ‘कर्मयोग’ है।

— महंत श्री मलंगानंद महाराज

पॉडकास्ट · सत्य-विमर्श

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